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ये 10 वादे जो कभी पूरे नहीं होते

ये 10 वादे जो कभी पूरे नहीं होते 1. कल बात करते हैं 2. 10 मिनट में आ रहा हूं 3. पार्टी पक्की 4. जल्द मिलेंगे 5. आपका काम हो जाएगा 6. अपने आप से किया वादा 7. पति, पत्नी से: तुम्हारे अलावा किसी को नहीं चाहता  8. हम 7 जनम साथ रहेंगे- 9. बस पहुंचने वाला हूं-

तुम्हारा फोन आया है

अजब सी ऊब शामिल हो गयी है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अंगड़ाई सी तोड़ी है मेरी खामोशियों ने एक नगमा गुनगुनाया है तुम्हारा फोन आया है, तुम्हारा फोन आया है सती का चौतरा दिख जाए जैसे रूप बाड़ी में कि जैसे छठ के मौके पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख्याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बाद हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बाद राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बाद शोहरत की मेहर जैसे सुबह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उन्वान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फोन आया है, तुम्हारा फोन आया है   see more

सूरज का सामना..

चार दिवारी से बहार निकले, तो हवा के छूने का एहसास हुवा. कुछ चमक सूरज की - आँखों को चका-चोंध करने लगी. आंखें खुलने से पहले ही बंद होती दिखीं. हम फिर से छाँव ढूंढ़ने लगे, किसी मज़बूत पेड़ की आड़ में छुपने लगे. अचानक किसी ने हाथ थामा- और जोर से खींचा. हम फिर से सूरज का सामना करने लगे, आंखें टकराई तो देखा! नई सुबह ने हाथ खीचा था. वो मुस्कराकर कह रही थी, पगले! ये ही है वो ख़जाना, जिसको- तूने अब पाया है. घुटन का हर वो ज़माना, जब तू मार के आया है. घबरा मत! एक टक देखता जा, हर चमक तेरे से टकरा कर- खुद झुक जायेगी. हर मदहोश हवा तुझे पाके खुश हो जाएगी, एक-दर-एक सीढ़ियाँ चढ़ता जा, होसलों को और बुलंद करता जा, बेरोकटोक बढ़ता जा – क्यूंकि- तुझे सूरज के करीब नहीं पहुँचना- खुद सूरज बनना है. फिर किसी के लिए तेज़ चमक बनना है. हर वो, जो उस पेड़ की आड़ में खड़ा रहेगा? तुझे उसका सामना करना है. मैं तो हर रोज़ तुझे यहीं मिलूंगी, तेरे इंतजार में, नई चेतना बन कर. नया एहसास बन कर. नई तमन्ना बन कर.

मै करू तो साला.....

ना कोई किसी का जीजा है, ना कोई किसी क साला है, चूप कीजिए,ना यहाँ कोई गडबड है ना कोई घोटाला है. जनता इन बहकाउ बातो पर बिल्कुल ही कान ना धरे, इक राजनैतिक साज़िश है, न्यूज् चैनलो का मशाला है. ना कोई कोयले की दलाली, ना ही कोई घालम-पेल , मेहनत कश है झूठे नही, बस इसलिए मुह काला है. ना हम किसी के कठपुतली , ना ही रिमोट कंट्रोल्ड राज करने का बस मेरा अन्दाज़ ही कुछ् निराला है. अरे विपछी भाई,क्यु रोते हो उनकी बेधडक तरक्की से, चाभी ढूढो उसकी तेरी किस्मत पर जडा, जो ताला है.

Impact of Social Media on Society

By sheshant saurabh "Do you have Facebook?" "Yes, of course. But I don't think you can find me, as there are too many people who have the same name as me. Try searching with my surname as well." "Hey, you celebrated your birthday in K-Box, right? I saw the photos in your Facebook." "Bro, I saw your comments about the YouTube video that I've posted in my blog. I'm happy that you are also deeply moved by the 'Dancing Peacock Man' as well." Social media or "social networking" has almost become part of our daily lives and being tossed around over the past few years. It is like any other media such as newspaper, radio and television but it is far more than just about sharing information and ideas. Social networking tools like Twitter, Facebook, Flickr and Blogs have facilitated creation and exchange of ideas so quickly and widely than the conventional media. The power of define and control a brand is s...

एक अनुभव ...!!! मेरी दक्षिण यात्रा

13 तीयदी चेन्नई, कोवलम कन्याकुमारी बन्नो .येनके स्थानम इस्तापतू वराले वराले नलद स्थलम. काडाली आडीता नल्ल climate सुगम उनडे .कडल तीरमाला वेलर वेलर वलद. नी आवडे पोगमन नल्ले स्थलम. वराले वराले नलद स्थलम ... ओह अईयो , दैईवा सैईद (सॉरी)!!!! क्षमा करे !!! मै मलयालम और तमिल में ही बताने लगा.वैसे मैंने उस भाषा मे लिखा है कि 13 तारीख को हम चेन्नई, कोवलम कन्याकुमारी गए. ये जगह बहुत ही खूबसूरत है. समुद्र के किनारे का मौसम बहुत अच्छा है. ऊची उठती लहरे बहुत अच्छी लगती है. आप भी यहाँ जरुर जाईएगा. बहुत अच्छी जगह है....!!! इतना ही नही दक्षिण भारत के मंदिर, खान पान, समुद्री किनारा  रहन सहन सभी कुछ अलग है पर बहुत अच्छा है. चेन्नई से महाबली पुरम का लगभग सडक से 1 धंटे का रास्ता है. सडको के किनारो पर लगे नारियल के पेड, छोटे छोटे मंदिर, मूर्तियो का काम अनायास ही हमारा ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं.एक और बात जो थोडी हट कर दिखाई दी वो थी लोगो के घरो का रंग गहरा और चटक. गहरा हरा, पीला, नीला बैंगनी कोई भी रंग हो सभी पर  आमतौर पर चटक ...

साथ छोड़ कर भागी ममता.....

साथ छोड़ कर भागी ममता,अब क्या होगा रे नज़र आ रहा सूरज ढलता, अब क्या होगा  रे नहीं मुलायम,रहते कायम,अपने  वादों पर नज़र बड़ी आवश्यक रखना,गुप्त इरादों पर उनका सपना,पी एम् पद का,अब क्या होगा रे नज़र आरहा सूरज ढलता,अब क्या होगा रे माया महा ठगिनी हम जानी,आनी जानी है कब इसका रुख बदल जाए, ये घाघ पुरानी है यदि उसने जो पाला पलता,तब क्या होगा रे नज़र आ रहा सूरज ढलता,अब क्या होगा रे अब तो करूणानिधि से ही करुणा की आशा है सी बी आइ का दबाब भी अच्छा  खासा है साम दाम से काम न बनता,तब क्या होगा रे नजर आरहा सूरज ढलता,अब क्या होगा रे  सब चीजों के दाम बढ़ गए,जनता है अकुलायी सुरसा जैसी मुख फैलाती,रोज रोज मंहगाई साथ छोड़ देगी यदि जनता,तब क्या होगा रे नज़र आरहा सूरज ढलता,अब क्या होगा रे.